
बांदीकुई। बांदीकुई जंक्शन पर शीघ्र ही भारतीय रेलवे की ऐतिहासिक धरोहर के रूप में एक स्टीम इंजन स्थापित किया जाएगा। इसके लगने से आमजन, रेल यात्री और युवा पीढ़ी भारतीय रेलवे के पुराने स्वरूप, तकनीकी विकास और गौरवशाली इतिहास को नजदीक से देख सकेंगे।
इस संबंध में उत्तर पश्चिम रेलवे द्वारा बांदीकुई रेलवे स्टेशन परिसर में प्रदर्शनी के लिए स्टीम लोकोमोटिव उपलब्ध कराने की औपचारिक स्वीकृति जारी कर दी गई है। यह स्टीम इंजन स्टेशन परिसर में एक आकर्षक हेरिटेज डिस्प्ले के रूप में स्थापित किया जाएगा, जो रेलवे के स्वर्णिम अतीत की झलक प्रस्तुत करेगा।
रेलवे अधिकारियों के अनुसार स्टीम इंजन भारतीय रेलवे के प्रारंभिक दौर की पहचान है। इसका प्रदर्शन ऐतिहासिक, शैक्षणिक और पर्यटन की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण होगा। इससे न केवल यात्रियों को रेलवे के गौरवशाली इतिहास की जानकारी मिलेगी, बल्कि बांदीकुई जंक्शन को भी एक नई पहचान प्राप्त होगी।
स्थानीय नागरिकों और रेल प्रेमियों में इस निर्णय को लेकर खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। लोगों का मानना है कि स्टीम इंजन की स्थापना से स्टेशन परिसर की सुंदरता बढ़ेगी और आने वाले समय में यह स्थान एक प्रमुख हेरिटेज और पर्यटन स्थल के रूप में विकसित हो सकता है।
गौरतलब है कि राजस्थान में स्टीम इंजन से चलने वाली पहली रेलगाड़ी वर्ष 1874 में आगरा से बांदीकुई के बीच चली थी। बांदीकुई को रेलनगरी के रूप में जाना जाता है और यहां रेलवे का लगभग 150 साल पुराना इतिहास जुड़ा हुआ है। अंग्रेजों के शासनकाल में बांदीकुई में स्टीम इंजन का कारखाना, मेंटेनेंस डिपो और डीआरएम कार्यालय तक संचालित रहा है।
विधायक भागचंद टांकड़ा द्वारा लंबे समय से बांदीकुई जंक्शन के बाहर मॉडल के रूप में स्टीम इंजन स्थापित करने की मांग की जा रही थी। इस संबंध में उन्होंने रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से भी मुलाकात कर बांदीकुई के ऐतिहासिक रेल महत्व से अवगत कराया था। रेलवे की स्वीकृति के बाद अब यह सपना साकार होने जा रहा है।

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