
जयपुर: मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने कहा कि प्रदेश में अपराधों के आंकड़ों में कमी आना एक शुभ संकेत है, लेकिन मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की मंशानुसार प्रदेश को अपराध मुक्त बनाने के लिए और अधिक प्रभावी प्रयास किए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि अपराधों पर नियंत्रण के लिए पुलिस का रेस्पॉन्स टाइम कम करना, त्वरित अनुसंधान और पुलिस थानों का आधुनिकीकरण सुनिश्चित किया जाए।
मुख्य सचिव मंगलवार को शासन सचिवालय में भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता एवं भारतीय साक्ष्य अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर आयोजित समीक्षा बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे।
सभी पुलिस थानों का डिजिटलाइजेशन और राजनेट कनेक्टिविटी जरूरी
मुख्य सचिव ने पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी पुलिस थानों का डिजिटलाइजेशन किया जाए तथा आधुनिक उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। उन्होंने थानों में मजबूत और निर्बाध वाई-फाई सुविधा के लिए सभी पुलिस थानों को राजनेट कनेक्टिविटी से जोड़ने के निर्देश भी दिए।
महिला कॉन्स्टेबल की नियुक्ति और समयबद्ध अनुसंधान पर जोर
उन्होंने कहा कि सभी थानों में महिला कॉन्स्टेबल की नियुक्ति सुनिश्चित की जाए, जिससे महिलाओं से संबंधित अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण किया जा सके। साथ ही उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि एफआईआर दर्ज होने और चार्जशीट पेश करने के बीच निर्धारित समय सीमा का कड़ाई से पालन किया जाए।
Read more: अपराधों पर अंकुश के लिए पुलिस थानों का आधुनिकीकरण जरूरी – मुख्य सचिव वी. श्रीनिवासजीरो एफआईआर और डिजिटल सुविधाओं के प्रति जागरूकता जरूरी
मुख्य सचिव ने बताया कि नए कानूनों के तहत अपराध कहीं भी घटित हुआ हो, उसकी रिपोर्ट किसी भी पुलिस थाने में जीरो एफआईआर के रूप में दर्ज कराई जा सकती है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश के सभी नागरिकों के लिए राजकॉप SOS अलर्ट की सुविधा उपलब्ध है, जबकि महिलाओं के लिए राजकॉप नागरिक मोबाइल एप पर ‘नीड हेल्प’ फीचर के माध्यम से तत्काल सहायता प्रदान की जा रही है।
उन्होंने आमजन को इन नवाचारों और नए प्रावधानों के प्रति जागरूक करने के निर्देश दिए, ताकि नागरिक इनका पूरा लाभ उठा सकें।
ई-साक्ष्य एप से अनुसंधान प्रक्रिया में तेजी
बैठक में पुलिस महानिरीक्षक (इंटेलिजेंस) प्रफुल्ल कुमार ने बताया कि पुलिस द्वारा ई-साक्ष्य एप का उपयोग किया जा रहा है। इस एप के माध्यम से घटनास्थल के वीडियो, फोटो और गवाहों के बयान डिजिटल रूप से रिकॉर्ड और सुरक्षित किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि संबंधित प्रकरण की संपूर्ण जानकारी भी इसी एप पर उपलब्ध रहती है।
उन्होंने यह भी जानकारी दी कि नवीन आपराधिक विधियों के अंतर्गत दर्ज मामलों में 60 दिनों में निस्तारित प्रकरणों की संख्या में वृद्धि हुई है।
बैठक में ये अधिकारी रहे उपस्थित
बैठक में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख शासन सचिव गायत्री राठौड़, अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस हवा सिंह घुमारिया, भूपेन्द्र साहू, महानिरीक्षक पुलिस प्रफुल्ल कुमार, अजयपाल लांबा, उप महानिरीक्षक पुलिस दीपक भार्गव, राजस्थान राज्य फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (SFSL) के निदेशक डॉ. अजय शर्मा तथा गृह एवं विधि विभाग के अधिकारी उपस्थित रहे।


