सरस राजसखी राष्ट्रीय मेला 2025 की धूम
मेले में दिनभर उमड़ी भीड़, लाइव डेमो और कस्टमाइज़ेशन ज़ोन बने आकर्षण का केंद्र

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जयपुर: जवाहर कला केंद्र जयपुर के शिल्पग्राम परिसर में राजस्थान ग्रामीण आजीविका विकास परिषद द्वारा आयोजित सरस राजसखी राष्ट्रीय मेला 2025 दिन-प्रतिदिन लोकप्रियता के नए आयाम स्थापित कर रहा है। शनिवार को मेले में दिनभर जयपुरवासियों की भारी भीड़ देखने को मिली, जहाँ लोग परिवार और मित्रों के साथ मेले के रंग-बिरंगे वातावरण का आनंद लेते नजर आए।
मेले में आयोजित लकी ड्रा को लेकर खरीदारों में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है और विजेताओं को पुरस्कार भी प्रदान किए जा रहे हैं। यह मेला 4 जनवरी 2026 तक जवाहर कला केंद्र में आयोजित किया जाएगा।
मेले के फ़ूड कोर्ट में देशभर के विविध स्वादों ने लोगों को आकर्षित किया, वहीं स्वयं सहायता समूह (SHG) की महिलाओं द्वारा निर्मित हस्तनिर्मित, पारंपरिक और अनूठे उत्पादों की जमकर खरीदारी हो रही है।

लाइव डेमो बना मेले की खास पहचान
इस वर्ष मेले की सबसे बड़ी खासियत कारीगरों द्वारा कला निर्माण का लाइव डेमो है, जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में आगंतुक उमड़ रहे हैं। लाइव डेमो के माध्यम से पारंपरिक कलाएं न केवल जीवंत हो रही हैं, बल्कि दर्शकों को उनकी बारीकियों को नजदीक से समझने का अवसर भी मिल रहा है।
अलवर के कारीगर लाख की चूड़ियाँ, पारंपरिक परिधान, मिट्टी के बर्तन और ब्लैक पॉटरी बनाते नजर आ रहे हैं। वहीं झुंझुनूं के कलाकार लिप्पन कला, क्रोशिया एक्सेसरीज़ और कढ़ाई का प्रदर्शन कर रहे हैं। जयपुर के कारीगर अगरबत्ती निर्माण और चूरू के कारीगर टाई एंड डाई की कला का सजीव प्रदर्शन कर रहे हैं, जो दर्शकों को विशेष रूप से आकर्षित कर रहा है।


कस्टमाइज़ेशन ज़ोन बना मुख्य आकर्षण
मेले का एक प्रमुख आकर्षण कस्टमाइज़ेशन ज़ोन है, जहाँ आगंतुक अपनी पसंद के अनुसार लाइव कस्टमाइज़्ड हस्तनिर्मित उत्पाद बनवा रहे हैं। कारीगर मौके पर ही रंग, डिज़ाइन, नाम, मोटिफ और पैटर्न के अनुसार उत्पाद तैयार कर रहे हैं, जिससे हर वस्तु खास और यादगार बन रही है।
यहाँ नाम या प्रतीक वाली रेज़िन और हैंडमेड की-चेन, कढ़ाईदार स्कार्फ, कपड़े, लकड़ी और रेज़िन के सजावटी बॉक्स, पेंटेड आर्ट, मिनिएचर, कोस्टर, पेन स्टैंड, ट्रे, रेज़िन आर्ट और सजावटी बर्तन लाइव तैयार किए जा रहे हैं।

ड्रेस ड्रेप क्लिक स्टॉल बना फोटोग्राफी हब
मेले में ‘ड्रेस ड्रेप क्लिक’ स्टॉल भी खास आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। यहाँ आगंतुक राजस्थानी, गुजराती, मराठी, पहाड़ी सहित विभिन्न क्षेत्रीय पारंपरिक ड्रेपिंग शैलियों को पहनकर फोटो खिंचवा रहे हैं। पारंपरिक गहनों, पगड़ी, ओढ़नी और एथनिक एक्सेसरीज़ के साथ इंस्टेंट फोटो कॉर्नर पर रंगीन लोक बैकग्राउंड में तस्वीरें खिंचवाकर लोग इस अनुभव को यादगार बना रहे हैं।
सरस राजसखी राष्ट्रीय मेला 2025 केवल खरीदारी का मंच नहीं, बल्कि यह भारतीय लोक कला, संस्कृति और महिला सशक्तिकरण का जीवंत उत्सव बनकर उभर रहा है।

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