
ढाका/नई दिल्ली: बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों, विशेषकर हिंदू समुदाय पर हो रहे अत्याचार थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। हिंसा और कट्टरपंथ के बीच अब एक और रूह कंपा देने वाली घटना सामने आई है। शरयतपुर (Shariatpur) जिले में एक 50 वर्षीय हिंदू व्यक्ति, खोकन दास, को भीड़ ने अपना निशाना बनाया। हमलावरों ने न केवल उन पर धारदार हथियारों से वार किया, बल्कि उन्हें गंभीर रूप से घायल करने के बाद आग के हवाले कर दिया।
क्या है पूरा मामला?
रिपोर्ट्स के अनुसार, यह बर्बर घटना 31 दिसंबर की रात को हुई। खोकन दास अपने घर की ओर जा रहे थे, तभी कट्टरपंथियों की एक हिंसक भीड़ ने उन्हें घेर लिया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, भीड़ ने उन पर हथियारों से हमला किया और फिर अधमरी हालत में उन्हें जला दिया। इस घटना के बाद इलाके में भारी तनाव है और हिंदू समुदाय में दहशत का माहौल बना हुआ है।
15 दिनों में अत्याचार की चौथी बड़ी घटना
बांग्लादेश में पिछले कुछ हफ्तों से हिंदुओं के खिलाफ हिंसा का एक व्यवस्थित पैटर्न नजर आ रहा है। खोकन दास पर हुआ यह हमला बीते 15 दिनों में चौथी बड़ी वारदात है:
1. 18 दिसंबर (मैमनसिंह): 29 वर्षीय हिंदू युवक दीपू चंद्र दास की भीड़ ने पीट-पीटकर हत्या कर दी। हमलावरों ने उसे पेड़ से लटकाया और बीच सड़क पर आग लगा दी।
2. 24 दिसंबर (राजबाड़ी): हुसैनडांगा इलाके में अमृत मंडल (29 वर्ष) को भीड़ ने कथित तौर पर पीट-पीटकर मार डाला। प्रशासन ने इसे जबरन वसूली का मामला बताकर पल्ला झाड़ने की कोशिश की, लेकिन परिजनों ने इसे सांप्रदायिक हत्या करार दिया।
3. दिसंबर का तीसरा सप्ताह (भालुका): एक कपड़ा कारखाने में काम करने वाले हिंदू युवक की उसके सहकर्मी ने गोली मारकर हत्या कर दी।
भारत में कड़ा विरोध और कूटनीतिक दबाव
बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हो रहे इन हमलों का असर भारत में भी देखा जा रहा है। दिल्ली, कोलकाता और त्रिपुरा सहित कई शहरों में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। भारतीय नेताओं ने इन घटनाओं की कड़े शब्दों में निंदा की है। विदेश मंत्रालय और भारत सरकार से मांग की जा रही है कि वे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इस मुद्दे को उठाएं और बांग्लादेश की अंतरिम सरकार पर हिंदुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कूटनीतिक दबाव बनाएं।
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