गौशालाओं को अनुदान भी देंगे और निर्माण भी कराएंगे – गोपालन मंत्री जोराराम कुमावत

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जयपुर। गोपालन मंत्री जोराराम कुमावत ने कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में प्रदेश सरकार गौवंश के संरक्षण और संवर्धन के लिए निरंतर कार्य कर रही है। गौवंश की सेवा हमारी संस्कृति और परंपरा का अभिन्न हिस्सा है। उन्होंने सदन में बताया कि प्रदेश में निराश्रित गौवंश के लिए 4 हजार से अधिक गौशालाएं संचालित हैं।
मंत्री ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में अनुदान के लिए पात्र 3,310 गौशालाओं से प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। कई स्थानों पर गौचर भूमि में गौशालाएं संचालित हैं, लेकिन एक रिट प्रकरण के कारण भूमि आवंटन में बाधा आ रही है। उन्होंने बताया कि राजस्व विभाग के नए परिपत्र के अनुसार जिन ग्राम पंचायतों में सिवायक चक भूमि उपलब्ध नहीं है, लेकिन पर्याप्त गौचर भूमि है, वहां गौशालाओं के लिए भूमि आवंटित की जा सकती है।
जोराराम कुमावत ने कहा कि ऐसे मामलों में जिला कलेक्टर के माध्यम से नियमानुसार भूमि आवंटन कराया जा सकता है। विधायक बहादुर सिंह के पूरक प्रश्न के जवाब में उन्होंने बताया कि ग्राम पंचायतों की चारागाह भूमि पंचायती राज विभाग के अधीन आती है और यदि उस पर अतिक्रमण है, तो उसे शीघ्र हटाया जाना चाहिए।
उन्होंने पंचायती राज मंत्री से आग्रह किया कि ऐसे प्रकरणों को चिन्हित कर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की जाए। मंत्री ने कहा कि प्रदेश में और अधिक नई गौशालाएं खोली जानी चाहिए, ताकि निराश्रित गौवंश की समुचित देखभाल हो सके।
उन्होंने बताया कि राज्य में पशु आश्रय स्थल योजना, पंचायत समिति स्तरीय नंदीशाला जन सहभागिता योजना और गौशाला विकास योजना संचालित की जा रही हैं। उन्होंने जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों से इन योजनाओं का व्यापक प्रचार-प्रसार करने और नई गौशालाओं के प्रस्ताव विभाग को भेजने का आग्रह किया।
इससे पहले लिखित उत्तर में उन्होंने बताया कि वैर विधानसभा क्षेत्र के उपखंड मुख्यालय वैर में फिलहाल सरकारी गौशाला खोलने का कोई प्रस्ताव नहीं है। प्रदेश में गौशालाओं की स्थापना और संचालन स्वयंसेवी संस्थाओं और ट्रस्टों द्वारा किया जाता है।

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