जयपुर: राजस्थान में सियासी बयानबाजी का दौर तेज हो गया है। राज्यसभा सांसद घनश्याम तिवाड़ी ने पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत द्वारा प्रेस कॉन्फ्रेंस में लगाए गए आरोपों पर तीखा पलटवार किया है। तिवाड़ी ने कहा कि गहलोत बेबुनियाद बयानों के जरिए भ्रमजाल बुनने की नाकाम कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अशोक गहलोत भ्रष्टाचार पर न ही बोलें तो बेहतर है, क्योंकि उनके कार्यकाल में घोटालों के नए रिकॉर्ड बने थे।
भ्रष्टाचार और पेपरलीक पर घेरा
तिवाड़ी ने कहा कि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के मंत्री और अधिकारी आज भी भ्रष्टाचार के आरोपों में सलाखों के पीछे हैं। उन्होंने पेपरलीक की घटनाओं का जिक्र करते हुए पूछा कि गहलोत किस मुंह से युवाओं की बात कर रहे हैं, जबकि उनके समय में युवाओं का भविष्य अंधकार में डाल दिया गया था। इसके विपरीत, भजनलाल सरकार ने सवा लाख से ज्यादा नौकरियां दी हैं और भर्ती कैलेंडर भी जारी कर दिया है।
“कांग्रेस आलाकमान भी गहलोत से परेशान”
अशोक गहलोत द्वारा ‘सरकार हिलने’ के दावों पर पलटवार करते हुए तिवाड़ी ने कहा कि गहलोत ‘इंतजार शास्त्र’ की बात कर रहे हैं, लेकिन उनकी खुद की सरकार तब हिली थी जब उनके उपमुख्यमंत्री (सचिन पायलट) अपने विधायकों को लेकर चले गए थे। उन्होंने कहा:
“मल्लिकार्जुन खड़गे जब आए थे और विधायकों की बैठक बुलाई गई थी, तब भी सरकार हिली थी। अब तो हालत यह है कि कांग्रेस का आलाकमान भी गहलोत से पीछा छुड़ाना चाहता है।”
OBC आरक्षण और पंचायतीराज पर हमलातिवाड़ी ने आरोप लगाया कि अशोक गहलोत ने पंचायतीराज के ढांचे को पूरी तरह बिगाड़ दिया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि भजनलाल सरकार ओबीसी आयोग की रिपोर्ट के आधार पर इस वर्ग को चुनाव में आरक्षण का पूरा अधिकार देना चाहती है। उन्होंने सवाल किया कि क्या गहलोत चाहते हैं कि ओबीसी आरक्षण के बिना ही चुनाव करा लिए जाएं?
योजनाओं की विफलता का जिक्र
आरजीएचएस (RGHS) योजना को लेकर तिवाड़ी ने कहा कि गहलोत के समय भुगतान न होने के कारण यह योजना बार-बार बाधित होती थी, जिसे वर्तमान सरकार ने ठीक कर सुचारू रूप से चलाया है। वहीं, जेजेएम (JJM) घोटाले पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि गहलोत के समय डाली गई पाइप लाइनों से पानी नहीं, बल्कि हवा निकलती है।
घनश्याम तिवाड़ी ने पूर्व मुख्यमंत्री को सलाह देते हुए कहा कि वे अपनी वरिष्ठता के अनुरूप ही बयानबाजी करें और अपनी राजनीति बचाने के लिए अपने आलाकमान से संवाद करें।









