नई दिल्ली |पश्चिम एशिया (वेस्ट एशिया) में बढ़ती तनातनी और हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) की वर्तमान स्थिति के साथ-साथ अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव को देखते हुए भारत सरकार की ‘एनर्जी सेफ्टी’ को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। हालात गंभीर होने की आशंका के बीच पेट्रोलियम मंत्रालय ने आम जनता से अपील की है कि वे पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) और इंडक्शन चूल्हे के उपयोग को बढ़ाएं।
पेट्रोलियम व प्राकतिक गैस मंत्रालय के अनुसार, आम जनता जितना अधिक एलपीजी (LPG) सिलेंडर पर आश्रित रहेगी, देश के लिए उतनी ही समस्या बढ़ेगी। जनता द्वारा एलपीजी के विकल्पों का चयन करने से सरकार पर एलपीजी प्रबंधन का बोझ कम होगा।पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव का बयानईरान-इजरायल संघर्ष पर आयोजित एक प्रेस वार्ता में पेट्रोलियम व प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने कहा:
“रसोई गैस आपूर्ति की स्थिति चिंताजनक है। हालांकि, देश की किसी भी गैस एजेंसी के पास वर्तमान में इसकी कोई कमी नहीं है। सरकारी तेल कंपनियां लगातार एलपीजी का उत्पादन बढ़ा रही हैं और छुट्टी के दिन भी एजेंसियां काम कर रही हैं। पांच किलो के छोटे एलपीजी सिलेंडर की बिक्री भी बढ़ाई जा रही है, लेकिन हम भारत की आम जनता से पाइप्ड नेचुरल गैस और इंडक्शन के इस्तेमाल को अपनाने का पुनः आग्रह करते हैं।”
आंकड़े: घरेलू उत्पादन और भारी निर्भरता
सुजाता शर्मा ने बताया कि वर्तमान में एलपीजी का घरेलू उत्पादन मांग की तुलना में आधे से भी कम है। आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए भारत को प्रतिदिन भारी मात्रा में आयात करना पड़ता है।
घरेलू उत्पादन का विश्लेषण
वर्तमान में हमारे घरेलू उत्पादन की स्थिति को समझना अत्यंत आवश्यक है। आंकड़े दर्शाते हैं कि प्रतिदिन घरेलू उत्पादन 45,000 टन है। यह संख्या हमारी आर्थिक गतिविधियों और क्षेत्रीय विकास का संकेत देती है। इस उत्पादन के माध्यम से हम अपनी आवश्यकताओं का एक हिस्सा पूरा करते हैं, लेकिन क्या यह पर्याप्त है?
कुल खपत और आयात की आवश्यकता
कुल खपत की स्थिति 80,000 से 1,00,000 टन के बीच मापी जाती है, जिसके आधार पर घरेलू उत्पादन स्पष्ट रूप से कम है। इसकी तुलना में, आयात पर हमारी निर्भरता 55,000 टन तक पहुँच जाती है। यह स्थिति बताती है कि हम अपने घरेलू उत्पादों के बजाय विदेशी स्रोतों पर अधिक निर्भर हो रहे हैं, जो आगे जाकर हमारी आर्थिक स्थिरता को प्रभावित कर सकता है।
आगे की रणनीतियाँ
इस स्थिति से निपटने के लिए हमें घरेलू उत्पादन को बढ़ाने के लिए विभिन्न रणनीतियों पर ध्यान देना चाहिए। निवेश और अनुसंधान एवं विकास में वृद्धि, कृषि और उद्योग के क्षेत्रों में नवाचार, और स्थानीय उत्पादकों को प्रोत्साहित करना शामिल हैं। यदि हम इन पहलुओं पर ध्यान देंगे, तो संभव है कि हम अपने आयात पर निर्भरता को कम कर सकें और आर्थिक स्वतंत्रता की दिशा में कदम बढ़ा सकें।
| विवरण | आंकड़े (प्रतिदिन – टन में) |
| घरेलू उत्पादन | 45,000 |
| कुल खपत | 80,000 से 1,00,000 |
| आयात पर निर्भरता | 55,000 |
आश्रित नहीं, आत्मनिर्भर बनने की ओर दें ध्यान
भारत का घरेलू उत्पादन उसकी कुल मांग के आधे से भी कम है, जिसके कारण देश बाहरी देशों से होने वाले आयात पर अत्यधिक निर्भर है। सरकार ने आत्मनिर्भरता के लिए निम्नलिखित सुझाव दिए हैं:
- PNG का उपयोग: खाना पकाने के लिए पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) को प्राथमिकता दें।
- इलेक्ट्रिक कुकिंग: रसोई में इंडक्शन चूल्हे का इस्तेमाल बढ़ाएं।
- विकल्पों का चयन: जनता जितने अधिक विकल्पों को अपनाएगी, सरकार पर एलपीजी प्रबंधन का बोझ उतना ही कम होगा।
- पारंपरिक ईंधन: यदि आप ग्रामीण या देहाती क्षेत्र में रहते हैं, तो पारंपरिक विकल्पों जैसे लकड़ी, खपरेल, लकड़ी के कोयले और गोबर के कंडे को प्राथमिकता दें।






