सरस राजसखी राष्ट्रीय मेला 2025: नववर्ष की पूर्व संध्या पर बढ़ी रौनक, फुटफॉल में हुआ इज़ाफ़ा

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जयपुर: सरस राजसखी राष्ट्रीय मेला 2025 अब अपने अंतिम सप्ताह में प्रवेश कर चुका है और इस दौर में यह मेला जयपुरवासियों के साथ-साथ देश-विदेश से आए पर्यटकों के लिए भी प्रमुख आकर्षण का केंद्र बन गया है। सर्दियों की सुहावनी शामों, रंग-बिरंगी रोशनी और देसी स्वाद के अनूठे संगम ने मेले की रौनक को और बढ़ा दिया है। नववर्ष की पूर्व संध्या पर मेले में आगंतुकों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।
छुट्टियों में लोगों की पहली पसंद बना सरस राजसखी मेला

छुट्टियों का आनंद लेने, पारंपरिक खरीदारी करने और ग्रामीण संस्कृति को नजदीक से देखने के लिए हर दिन बड़ी संख्या में लोग मेले का रुख कर रहे हैं। पारंपरिक हस्तशिल्प, लोकसंस्कृति और स्वादिष्ट व्यंजनों का संगम इस मेले को खास पहचान दे रहा है।
सांस्कृतिक मंच पर लोकनृत्यों की धूम
मेले का सांस्कृतिक मंच इन दिनों दर्शकों से खचाखच भरा हुआ है। बुधवार को आयोजित सांस्कृतिक संध्या में हरियाणा की लोकसंस्कृति की झलक कलाकार ज्योति दास की प्रस्तुति में देखने को मिली। डफ और झूमर नृत्य की ताल पर दर्शक झूम उठे। वहीं, गौरव राणा द्वारा प्रस्तुत राजस्थानी लोक नृत्य ने मरुस्थलीय संस्कृति की जीवंत छवि मंच पर साकार कर दी। पारंपरिक वेशभूषा और लोकसंगीत ने पूरे वातावरण को उत्सवमय बना दिया।
सोशल मीडिया पर भी ट्रेंड कर रहा है मेला
सरस राजसखी मेला अब डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर भी खासा लोकप्रिय हो रहा है। सोशल मीडिया पर मेले से जुड़ी रील्स, फोटो और वीडियो तेजी से वायरल हो रही हैं। आमजन के साथ-साथ सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स भी मेले की रौनक, स्टॉल्स की विविधता और सांस्कृतिक कार्यक्रमों को साझा कर रहे हैं, जिससे मेले की लोकप्रियता और बढ़ रही है।
खरीदारी के शौकीनों के लिए शिल्प और हथकरघा का खजाना

खरीदारी के शौकीनों के लिए सरस राजसखी मेला किसी खजाने से कम नहीं है। जूट से बने पर्यावरण-अनुकूल पर्स और सजावटी सामान लोगों को आकर्षित कर रहे हैं। टेराकोटा और मिट्टी के पारंपरिक बर्तन अपनी सादगी और कलात्मकता से खास पहचान बना रहे हैं। वहीं, विभिन्न राज्यों से आई हथकरघा सिल्क साड़ियां और रंग-बिरंगे दुपट्टे महिलाओं की पहली पसंद बने हुए हैं।
संस्कृति और परंपरा का जीवंत उत्सव
कुल मिलाकर, सरस राजसखी राष्ट्रीय मेला 2025 अपने अंतिम सप्ताह में भी पूरे उत्साह और उमंग के साथ जयपुर की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत कर रहा है। यह मेला न केवल खरीदारी और मनोरंजन का केंद्र है, बल्कि भारतीय लोककला, संस्कृति और परंपराओं का जीवंत उत्सव भी है, जिसका अनुभव लेने के लिए देश-विदेश से आए पर्यटक भी स्वयं को रोक नहीं पा रहे हैं।

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