जयपुर। राजस्थान विधानसभा के बजट सत्र (फरवरी 2026) में डीडवाना से निर्दलीय विधायक युनुस खान के एक बयान ने प्रदेश की सियासत में हलचल मचा दी है। बजट पर चर्चा के दौरान युनुस खान ने सीधे तौर पर सरकार को घेरा और आरोप लगाया कि कैबिनेट के तीन सबसे कद्दावर मंत्रियों के विभागों के बजट में कटौती की गई है। खान ने इसे ‘जातिगत राजनीति’ से जोड़ते हुए सदन में गंभीर सवाल उठाए।
किन मंत्रियों के विभागों में चली ‘कैंची’?
युनुस खान ने सदन में आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि वित्त वर्ष 2026-27 के अनुमानित आय-व्यय में तीन प्रमुख मंत्रियों के विभागों के बजट में पिछले साल के मुकाबले कमी की गई है:
1. दीया कुमारी (उपमुख्यमंत्री एवं वित्त मंत्री): इनके अधीन आने वाले सार्वजनिक निर्माण विभाग (PWD) के बजट में कटौती।
2. गजेंद्र सिंह खींवसर (चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री): स्वास्थ्य विभाग के बजट आवंटन में कमी।
3. राज्यवर्धन सिंह राठौड़ (सूचना प्रौद्योगिकी एवं खेल मंत्री): आईटी और युवा एवं खेल विभाग के बजट में कटौती।
‘जातिगत संयोग’ पर छिड़ी बहस
युनुस खान ने तंज कसते हुए कहा, “यह बड़ा अजीब संयोग है कि जिन तीन मंत्रियों के विभागों के बजट काटे गए हैं, वे तीनों एक ही विशेष समाज (राजपूत) से ताल्लुक रखते हैं। क्या यह केवल एक संयोग है या फिर सरकार का कोई नया राजनीतिक प्रयोग? मैं सरकार को सचेत कर रहा हूँ कि इस कटौती की गूँज और इसकी आग नीचे तक जाएगी।”
अल्पसंख्यक बजट पर भी साधा निशाना
खान ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि अल्पसंख्यक विभाग का बजट कम करना तो समझ आता है क्योंकि उनके लिए कोई बोलने वाला नहीं है और उसे ‘तुष्टीकरण’ के नाम पर काटा जा सकता है, लेकिन सत्ता पक्ष के प्रभावशाली मंत्रियों के साथ ऐसा व्यवहार चौंकाने वाला है। उन्होंने सवाल किया कि जब सरकार विकास और युवाओं की बात कर रही है, तो आईटी, खेल और पीडब्ल्यूडी जैसे महत्वपूर्ण विभागों का बजट कम क्यों किया गया?
इस बयान के बाद सदन में काफी देर तक शोर-शराबा और तीखी नोकझोंक देखने को मिली। विपक्ष ने भी खान के सुर में सुर मिलाते हुए सरकार की मंशा पर सवाल उठाए हैं।


